कलमकार हूँ मैं, खुद को खबरदार रखता हूँ। बन्दूक और गोलियों की जरूरत नहीं मुझे, अपनी कलम को ही हथियार रखता हूँ। पीठ पीछे से वार करने की आदत नहीं मेरी। अपनी लड़ाई को हमेशा,आर पार रखता हूँ।। पतझड़ों से सामना होता है आये दिन, इसलिए दिल में मौशम-ए-बहार रखता हूँ।। सोचकर डुबा न दे कस्ती को कोई मेरी,इस बीच समन्दर में। हाथ में हमेशा कलम की पतबार रखता हूँ।। मेरी कलम की स्याही का स्वाद बहुत तीखा है। दोस्त हों न हों, दुश्मन हज़ार रखता हूँ।। झूठ की बुनियाद पर दुकान चलाने का शौक नहीं मेरा। ईमानदारी, सत्यता,परोपकार का खोले मैं बाज़ार रखता हूँ।। पहचाना जाता हूँ अपनी इसी पहचान से मैं। दुश्मनों के लिए दरियादिली और दोस्तों के लिए प्यार रखता हूँ।। हवाओं में बात करने की आदत नहीं मेरी। अपने हर एक लफ्ज़ को बजनदार रखता हूँ।। छूट जाए इतिहास के पन्नों पर अमिट छाप जिससे। स्याहियाँ मैं ऐसी असरदार रखता हूँ।। साबधान रहना मुझसे ए फरेबी लोगों... जितनी तुम्हारी तलवारों में धार है, उतनी मैं अपनी कलम में धार रखता हूँ।। कलमकार हूँ मैं, खुद को खबरदार रखता हूँ। बन्दूक और गोलियों की जरूरत नहीं म...
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